सैल्फी ले रही है!!

पागल लड़की
वो छत पर खड़ी थी,
बाल खुले और बिखरे,

कभी मुँह फुलाती कभी मुँह पिचकती
कभी मुँह इधर कभी उधर,
बार-बार सामने निहारती,
कभी हँस देती।।।।।।।

दीन दुनियाँ से बेखबर,
मुझे बहुत दया आ रही थी,
इतनी कम उम्र में पागल,
पूरी जिंदगी पड़ी है,
क्या होगा?
कैसे होगा?

मुझे उसके पिता की चिंता सताने लगी।
बेचारा दिन रात मेहनत करके परिवार पालता है,
ऊपर से इस पागल लड़की को कैसे सम्हालेगा?

धीरे-धीरे पागलपन और बढ़ गया,
मै घबराया,
मैने अपनी बिटिया को बुलाया और
अपनी चिंता से अवगत कराया ।

बिटिया बोली “पापा वो पागल नही है ,
..
..
..
वो तो सैल्फी ले रही है”!!!
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