हमें तो अपनों ने लूटा!!

शायर: हमें तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहाँ दम था, मेरी कश्ती वहां डूबी, जहां पानी कम था… शायर की बेगम: तुम तो थे ही गधे, तुम्हारे भेजे में कहां दम था, वहां कश्ती लेकर गए ही क्यों, जहां पानी कम था…

रोज़ रोज़ वजन नाप कर !!

अर्ज़ है – रोज़ रोज़ वजन नाप कर क्या करना है, एक दिन तो सबने मरना है, चार दिन की है ज़िंदगी, खा लो जी भर के, अगला जन्म फिर 3 किलो से शुरु करना है…..!!